कीचड़ भरे रास्ते से लेकर आईटीआई परीक्षा में गड़बड़ी तक, जनसुनवाई में उठे सवाल
सिमर एक्सप्रेस संवाददाता
शिवपुरी। कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों और निजी आईटीआई के विद्यार्थियों ने अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने शिकायतें रखीं। शिवपुरी जनपद के ग्राम बिची मोहनगढ़ की दुर्गापुरी आदिवासी बस्ती के ग्रामीण जहां कीचड़ से सने रास्ते का बैनर लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे, वहीं निजी आईटीआई के विद्यार्थियों ने प्रायोगिक परीक्षा में अनियमितता का आरोप लगाते हुए करीब 2500 विद्यार्थियों की परीक्षा की निष्पक्ष जांच की मांग की।
डेढ़ किमी रास्ता बारिश में बन जाता है दलदल
दुर्गापुरी आदिवासी बस्ती के ग्रामीण पहले पैदल रैली के रूप में निकले और बाद में ट्रैक्टरों से कलेक्ट्रेट पहुंचे। ग्रामीणों ने कलेक्टर को आवेदन देकर बस्ती तक सड़क निर्माण और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान कराने की मांग की। ग्रामीणों के अनुसार बस्ती तक पहुंचने वाला करीब डेढ़ किलोमीटर रास्ता बारिश के बाद कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे आवागमन मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण जमीर सिंह ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं और मरीजों को होती है। प्रसव के समय महिलाओं को कई बार ट्रैक्टर या खाट के सहारे डेढ़ किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने बताया कि शासकीय माध्यमिक स्कूल के आसपास भी बारिश का पानी भर जाता है। उनका दावा है कि जलभराव की स्थिति इतनी गंभीर है कि स्कूल परिसर के आसपास भैंसें तक तैरती नजर आती हैं। इससे विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
आईटीआई की प्रायोगिक परीक्षा पर सवाल
दूसरी ओर जिले की विभिन्न निजी आईटीआई के विद्यार्थियों ने शासकीय आईटीआई शिवपुरी को परीक्षा केंद्र बनाकर कराई गई प्रायोगिक परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विद्यार्थियों के अनुसार करीब 2500 विद्यार्थियों की परीक्षा हुई और प्रतिदिन लगभग 400 विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल किया गया। परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने पर उन्होंने परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की।
विद्यार्थियों ने परीक्षा के दौरान मशीन, टूल्स और रॉ मटेरियल की उपलब्धता की जांच कराने की मांग की। साथ ही परीक्षा अवधि के सीसीटीवी फुटेज, उपस्थिति पत्रक, मूल्यांकन पत्रक, परीक्षकों द्वारा दिए गए अंक तथा रॉ मटेरियल की प्राप्ति और वितरण संबंधी रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग प्रशासन से की गई।
पुनः परीक्षा या पुनर्मूल्यांकन की मांग
विद्यार्थियों का कहना है कि यदि जांच में संसाधनों की कमी, मानसिक दबाव या मूल्यांकन में अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रभावित विद्यार्थियों के हित में दोबारा प्रायोगिक परीक्षा कराने या पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था की जाए।
जनसुनवाई में दोनों मामलों को लेकर ग्रामीणों और विद्यार्थियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर जल्द समाधान कराने की मांग की।
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